करवा चौथ व्रत पूजन विधि, कथा एवं आरती
By Shalie Saxena, Lucknow | 11am IST | 31 October 2023
उत्तर प्रदेश में करवा चौथ व्रत 2023 का शुभ मुहूर्त सुबह 6:36 से रात 8:26 बजे तक है। करवा चौथ की पूजा शाम 5:36 मिनट से शाम 6:54 मिनट तक है और चंद्रोदय का समय रात 8 बजकर 5 मिनट दिन बुधवार 1 नवंबर 2023 है।

हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाले करवा चौथ के व्रत में सुहागन अपने पति की लंबी उम्र और उत्तम स्वास्थ्य के लिए कठोर निर्जला व्रत रखती हैं। यह व्रत प्रातः सूर्योदय से प्रारंभ होता है, जो रात में चंद्रमा पूजन के बाद पति के हाथों से खुलता है। इस बीच महिलाएं किसी भी प्रकार का जल, अन्न, फल ग्रहण नहीं करतीं।
करवा चौथ व्रत
करवा चौथ के व्रत की शुरुआत सास के हाथ से सरगी लेकर की जाती है, जिसके बाद प्रातः ही स्नान-ध्यान के पश्चात व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूरा दिन निर्जला व्रत रहें। इस बीच संपूर्ण पूजन सामग्री इकट्ठा कर लें। गाय के गोबर या मिट्टी से गौर गणेश बना लें, जिसके बाद माता गौरी का आह्वान करें। उन्हें सुहाग का संपूर्ण श्रृंगार चढ़ाएं। करवा में गेहूं और उसके ढक्कन में चीनी का बूरा रखें। रोली से करवा पर स्वास्तिक बनाएं। शाम के समय गौरी और गणेश की पूजा करें और कथा सुनें। रात्रि में चंद्रमा को देख पति से आशीर्वाद लें और व्रत का पारण करें।
व्रत और पारण का भोग
करवा चौथ के भोग और व्रत के पारण के लिए अपनी सुविधा अनुसार भोग बनाया जा सकता है, जैसे पूड़ी, हलवा, चूरमा, दाल, कढ़ी, खीर सब्जी इत्यादि। इन भोगों में लहसुन-प्याज का प्रयोग नहीं किया जाता। इस व्रत में 56 प्रकार का भोग भी लगाया जा सकता है।
व्रत का मुहूर्त
उत्तर प्रदेश में करवा चौथ व्रत 2023 का शुभ मुहूर्त सुबह 6:36 से रात 8:26 बजे तक है। करवा चौथ की पूजा शाम 5:36 मिनट से शाम 6:54 मिनट तक है और चंद्रोदय का समय रात 8 बजकर 5 मिनट दिन बुधवार 1 नवंबर 2023 है।

कलश और थाली का प्रतीकात्मक महत्व
करवाचौथ की पूजा में मिट्टी या तांबे के कलश से चन्द्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। पुराणों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कलश में ब्रह्मा, विष्णु, महेश, सभी नदी, सागर, सरोवर एवं ३३ कोटि देवी-देवता विराजते हैं। पूजा की थाली में रोली, चावल, दीपक, फल, फूल, बताशा, सुहाग का सामान और जल से भरा कलश रखा जाता है। करवा के ऊपर मिटटी के बड़े दीपक में जौ या गेहूं रखे जाते हैं। जौ समृद्धि, शांति, उन्नति और खुशहाली का प्रतीक होते हैं।
महत्वपूर्ण हैं सींक
करवा चौथ व्रत की पूजा में सींक मां करवा की शक्ति का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार मां करवा के पति का पैर मगरमच्छ ने पकड़ लिया था। तब वह कच्चे धागे से मगर को बांध कर यमराज के पास पहुंच गईं। वे उस समय भगवान चित्रगुप्त के खाते देख रहे थे। करवा ने सात सींक लेकर उन्हें झाड़ना शुरू किया। इस कारण खाते आकाश में उड़ने लगे। करवा ने यमराज से अपने पति की रक्षा करने की प्रार्थना की, तब उन्होंने मगरमच्छ का वध कर करवा के पति की जान बचाई और उन्हें लंबी उम्र का वरदान दिया। एक अन्य कथा के अनुसार करवा ने मगरमच्छ को सूती धागे से बांध दिया और यम (मृत्यु के देवता) से मगरमच्छ को नरक भेजने के लिए कहा। यम ने मना कर दिया। इस पर करवा ने यम को शाप देने और उसे नष्ट करने की धमकी दी। पतिव्रता (समर्पित) पत्नी द्वारा श्राप दिए जाने के डर से यम ने मगरमच्छ को नरक भेज दिया और करवा के पति को लंबी उम्र का आशीर्वाद दिया।
करवा चौथ व्रत कथा:

साहूकार के सात लड़के, एक लड़की की कहानी
करवा चौथ की पौराणिक व्रत कथा
श्री गणेशाय नमः !
एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। एक बार कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी सहित उसकी सातों बहुओं और उसकी बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा। इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही मैं आज भोजन करूंगी। साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दु:ख हुआ। साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।
साहूकार की बेटी अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत भंग करने के कारण विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। इस कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में लग गया। साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया।
इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।
करवा चौथ माता की जय !
करवा माता की आरती
